2.1.1 धारा 43: कंप्यूटर को नुकसान के लिए दंड (Penalty for Damage to Computer)
धारा 43 IT अधिनियम का मूलभूत प्रावधान है जो कंप्यूटर, कंप्यूटर सिस्टम या नेटवर्क को अनधिकृत पहुंच और नुकसान के लिए सिविल दायित्व निर्धारित करता है। यह धारा 66 के आपराधिक प्रावधान की नींव है।
धारा 43 सिविल है, आपराधिक नहीं। यह मुआवजे (Compensation) का प्रावधान करती है, कारावास का नहीं। जब धारा 43 के कृत्य "बेईमानी से" (dishonestly) या "कपटपूर्ण तरीके से" (fraudulently) किए जाते हैं, तब धारा 66 के तहत आपराधिक कार्रवाई होती है।
धारा 43 के अंतर्गत दंडनीय कृत्य
| खंड | कृत्य (Act) | सरल व्याख्या |
|---|---|---|
| (a) | अनधिकृत पहुंच (Unauthorized Access) | बिना अनुमति किसी कंप्यूटर में प्रवेश |
| (b) | अनधिकृत डाउनलोड/कॉपी (Download/Copy) | डेटा या सूचना की अनधिकृत प्रति |
| (c) | वायरस/कंटामिनेंट इंट्रोडक्शन | मैलवेयर, वायरस, ट्रोजन डालना |
| (d) | कंप्यूटर/नेटवर्क को नुकसान | सिस्टम को क्षति पहुंचाना |
| (e) | सेवा में व्यवधान (Disruption) | DoS/DDoS अटैक |
| (f) | अनधिकृत सहायता (Assistance) | किसी को अनधिकृत पहुंच में मदद |
| (g) | पासवर्ड चोरी (Password Theft) | पासवर्ड, एक्सेस कोड की चोरी |
| (h) | धोखाधड़ीपूर्ण शुल्क (Fraudulent Charges) | किसी अन्य के खाते पर शुल्क |
| (i) | डेटा विनाश/परिवर्तन | डेटा मिटाना या बदलना |
| (j) | स्रोत डेटा चोरी | मूल डेटा की चोरी |
मुआवजा (Compensation)
एक IT कर्मचारी ने कंपनी छोड़ने से पहले ग्राहक डेटाबेस कॉपी कर लिया। उसने इसे प्रतिस्पर्धी को बेचने की योजना बनाई।
विश्लेषण:
- धारा 43(b): अनधिकृत डाउनलोड/कॉपी - सिविल दायित्व
- धारा 66: यदि बेईमानी से किया - आपराधिक दायित्व
- धारा 43A: यदि कंपनी की सुरक्षा कमजोर थी - कंपनी पर भी दायित्व
2.1.2 धारा 65: सोर्स कोड से छेड़छाड़ (Tampering with Computer Source Documents)
धारा 65 कंप्यूटर सोर्स कोड को जानबूझकर छिपाने, नष्ट करने या बदलने को अपराध बनाती है। यह सॉफ्टवेयर पायरेसी और कोड चोरी के मामलों में महत्वपूर्ण है।
"जो कोई भी जानबूझकर या इरादतन किसी कंप्यूटर सोर्स कोड को छिपाता, नष्ट करता है या बदलता है जिसे उस समय प्रभावी कानून द्वारा रखना आवश्यक है..." धारा 65, IT अधिनियम 2000
धारा 65 के आवश्यक तत्व
- कंप्यूटर सोर्स कोड: प्रोग्राम, कंप्यूटर कमांड, डिज़ाइन, लेआउट
- जानबूझकर कृत्य: छिपाना, नष्ट करना, या बदलना
- कानूनी आवश्यकता: जिसे कानून द्वारा रखना अनिवार्य हो
दंड (Punishment)
सॉफ्टवेयर कंपनियों के लिए: जब कोई कर्मचारी सोर्स कोड चुराकर प्रतिस्पर्धी के पास जाता है, तो धारा 65 के साथ-साथ धारा 43, 66 और कॉपीराइट अधिनियम की धाराएं भी लागू हो सकती हैं।
2.1.3 धारा 66: कंप्यूटर संबंधित अपराध - हैकिंग (Computer Related Offences)
धारा 66 IT अधिनियम का सबसे महत्वपूर्ण आपराधिक प्रावधान है। यह धारा 43 में वर्णित कृत्यों को आपराधिक बनाती है जब वे बेईमानी से (dishonestly) या कपटपूर्ण तरीके से (fraudulently) किए जाते हैं।
समीकरण: धारा 43 का कृत्य + बेईमानी/कपट = धारा 66 का अपराध
धारा 43 सिविल उपचार देती है (मुआवजा), जबकि धारा 66 आपराधिक दंड देती है (कारावास + जुर्माना)।
"बेईमानी" और "कपटपूर्ण" की परिभाषा
बेईमानी (Dishonestly)
BNS धारा 2(15) के अनुसार: जो कोई किसी अन्य व्यक्ति को अन्यायपूर्ण हानि या स्वयं को अन्यायपूर्ण लाभ पहुंचाने के इरादे से कोई काम करता है।
उदाहरण: किसी के बैंक खाते से पैसे निकालना
कपटपूर्ण (Fraudulently)
BNS धारा 2(17) के अनुसार: धोखा देने के इरादे से किया गया कोई कार्य, चाहे धोखा वास्तव में हुआ हो या नहीं।
उदाहरण: फर्जी वेबसाइट बनाकर लॉगिन विवरण चुराना
दंड (Punishment)
हैकर ने एक अस्पताल के सर्वर में घुसकर सभी मरीजों के रिकॉर्ड एन्क्रिप्ट कर दिए और ₹10 लाख बिटकॉइन में मांगे।
लागू धाराएं:
- धारा 66: अनधिकृत पहुंच + बेईमानी = हैकिंग
- धारा 66F: यदि अस्पताल "महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना" है = साइबर आतंकवाद
- धारा 308 BNS: जबरन वसूली (Extortion)
- धारा 43: मुआवजे के लिए सिविल कार्रवाई
2.1.4 धारा 66C, 66D, 66E, 66F: विशेष साइबर अपराध
धारा 66C: पहचान की चोरी (Identity Theft)
जो कोई भी किसी अन्य व्यक्ति के इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर, पासवर्ड या अन्य विशिष्ट पहचान विशेषता का कपटपूर्ण या बेईमानी से उपयोग करता है।
दंड - धारा 66C
धारा 66D: कंप्यूटर संसाधन द्वारा प्रतिरूपण (Cheating by Personation)
जो कोई भी किसी संचार उपकरण या कंप्यूटर संसाधन का उपयोग करके किसी अन्य व्यक्ति का प्रतिरूपण करके धोखाधड़ी करता है।
दंड - धारा 66D
66C: पहचान चिह्न (credentials) का उपयोग - जैसे किसी का पासवर्ड उपयोग करना
66D: व्यक्ति का प्रतिरूपण - जैसे बैंक अधिकारी बनकर फोन करना
व्यवहार में: अक्सर दोनों धाराएं एक साथ लागू होती हैं।
धारा 66E: गोपनीयता का उल्लंघन (Violation of Privacy)
जो कोई भी जानबूझकर किसी व्यक्ति के निजी अंगों की छवि कैप्चर, प्रकाशित या प्रसारित करता है बिना उसकी सहमति के, ऐसी परिस्थितियों में जहां व्यक्ति को गोपनीयता की उचित अपेक्षा थी।
दंड - धारा 66E
धारा 66F: साइबर आतंकवाद (Cyber Terrorism)
IT अधिनियम का सबसे गंभीर अपराध। यह धारा उन साइबर हमलों को कवर करती है जो भारत की एकता, अखंडता, सुरक्षा या संप्रभुता को खतरा पहुंचाते हैं या जनता में आतंक फैलाते हैं।
IT अधिनियम धारा 70 के तहत सरकार कुछ कंप्यूटर संसाधनों को "महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना" घोषित कर सकती है। इन पर हमला स्वचालित रूप से धारा 66F के दायरे में आता है।
उदाहरण: बिजली ग्रिड, बैंकिंग नेटवर्क, रक्षा प्रणालियां, अस्पताल
दंड - धारा 66F
2.1.5 धारा 66A: निरस्त धारा (Struck Down Section)
धारा 66A असंवैधानिक घोषित और निरस्त।
श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ (2015) में सुप्रीम कोर्ट ने धारा 66A को अनुच्छेद 19(1)(a) का उल्लंघन मानते हुए निरस्त कर दिया।
क्यों निरस्त हुई?
- अस्पष्टता (Vagueness): "अपमानजनक", "असुविधाजनक" जैसे शब्द अत्यंत व्यापक और अस्पष्ट थे
- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता: वैध अभिव्यक्ति को भी अपराध बनाने की संभावना
- दुरुपयोग: राजनीतिक विरोधियों और पत्रकारों के विरुद्ध व्यापक दुरुपयोग
यदि आपके मुवक्किल पर धारा 66A के तहत FIR दर्ज है:
- तुरंत BNSS धारा 528 के तहत खारिज याचिका (Quashing Petition) दायर करें
- श्रेया सिंघल निर्णय का हवाला दें
- आरोप स्वयं शून्य है - मुकदमा जारी नहीं रह सकता
धारा 66A के बाद विकल्प
| पुराना अपराध (66A) | वर्तमान विकल्प |
|---|---|
| अपमानजनक संदेश | BNS धारा 356 (मानहानि) |
| आपत्तिजनक सामग्री | IT अधिनियम धारा 67 |
| धमकी भरे संदेश | BNS धारा 351 (आपराधिक धमकी) |
| झूठी खबर | कोई विशेष प्रावधान नहीं |
2.1.6 धारा 67, 67A, 67B: अश्लीलता और यौन सामग्री (Obscenity and Sexual Content)
धारा 67: अश्लील सामग्री का प्रकाशन
इलेक्ट्रॉनिक रूप में अश्लील सामग्री का प्रकाशन या प्रसारण।
दंड - धारा 67
धारा 67A: यौन स्पष्ट सामग्री (Sexually Explicit Material)
यौन स्पष्ट कृत्य या आचरण वाली सामग्री का प्रकाशन या प्रसारण।
दंड - धारा 67A
धारा 67B: बच्चों को दर्शाती यौन सामग्री (CSAM)
धारा 67B बाल यौन शोषण सामग्री (Child Sexual Abuse Material - CSAM) से संबंधित है। इसमें शामिल है:
- बच्चों को यौन स्पष्ट कृत्य में दर्शाना
- ऐसी सामग्री का प्रकाशन, संग्रह, या प्रसारण
- ऑनलाइन बच्चों को यौन शोषण के लिए प्रलोभित करना
- बच्चों के साथ ऑनलाइन यौन संबंध को सुगम बनाना
दंड - धारा 67B
धारा 67B + POCSO: बच्चों से संबंधित मामलों में POCSO अधिनियम भी लागू होता है। POCSO के तहत दंड अधिक कठोर हो सकता है।
POCSO धारा 13, 14, 15: बाल अश्लीलता से संबंधित - 5 से 7 वर्ष कारावास
67 vs 67A vs 67B: तुलना
| धारा | विषय | पहली सजा | दूसरी सजा |
|---|---|---|---|
| 67 | अश्लील सामग्री (वयस्क) | 3 वर्ष + ₹5L | 5 वर्ष + ₹10L |
| 67A | यौन स्पष्ट सामग्री (वयस्क) | 5 वर्ष + ₹10L | 7 वर्ष + ₹10L |
| 67B | बच्चों वाली सामग्री (CSAM) | 5 वर्ष + ₹10L | 7 वर्ष + ₹10L |
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- धारा 43 सिविल है: मुआवजा ₹5 करोड़ तक - धारा 66 इसका आपराधिक संस्करण है
- धारा 66 का सूत्र: धारा 43 का कृत्य + बेईमानी/कपट = आपराधिक अपराध
- 66A निरस्त: श्रेया सिंघल (2015) - कभी भी FIR में उपयोग न करें
- 66C vs 66D: 66C = credentials का उपयोग, 66D = व्यक्ति का प्रतिरूपण
- 66F सबसे गंभीर: साइबर आतंकवाद - आजीवन कारावास तक
- 67B + POCSO: बच्चों के मामलों में दोनों कानून लागू
भाग 2.1 क्विज़
IT अधिनियम अपराधों की अपनी समझ का परीक्षण करें।
धारा 43 सिविल दायित्व (मुआवजा ₹5 करोड़ तक) निर्धारित करती है। जब समान कृत्य बेईमानी से या कपटपूर्ण तरीके से किए जाते हैं, तब धारा 66 के तहत आपराधिक कार्रवाई होती है।
श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ (2015) में सुप्रीम कोर्ट ने धारा 66A को अनुच्छेद 19(1)(a) (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) का उल्लंघन मानते हुए असंवैधानिक घोषित किया।
धारा 66F IT अधिनियम का सबसे गंभीर अपराध है। इसके तहत आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। यह संज्ञेय और गैर-जमानतयोग्य अपराध है।
धारा 66C: पहचान चिह्नों (पासवर्ड, डिजिटल हस्ताक्षर) का उपयोग। धारा 66D: किसी व्यक्ति या संस्था का प्रतिरूपण करना। व्यवहार में अक्सर दोनों एक साथ लागू होती हैं।
बच्चों से संबंधित यौन अपराधों में POCSO (Protection of Children from Sexual Offences) अधिनियम अनिवार्य रूप से लागू होता है। POCSO के तहत दंड IT अधिनियम से अधिक कठोर हो सकता है।
धारा 43 के तहत अधिनिर्णायक अधिकारी (Adjudicating Officer) ₹5 करोड़ तक का मुआवजा दिला सकता है। यह सिविल उपचार है, आपराधिक दंड नहीं।
धारा 65 कंप्यूटर सोर्स कोड को छिपाने, नष्ट करने या बदलने को अपराध बनाती है। यह सॉफ्टवेयर पायरेसी, कोड चोरी और IP चोरी के मामलों में लागू होती है।
धारा 66E तब लागू होती है जब कोई बिना सहमति के किसी व्यक्ति के निजी अंगों की छवि कैप्चर, प्रकाशित या प्रसारित करता है, जहां व्यक्ति को गोपनीयता की उचित अपेक्षा थी।
रैनसमवेयर में: धारा 66 (अनधिकृत पहुंच/हैकिंग) + धारा 308 BNS (जबरन वसूली)। यदि महत्वपूर्ण अवसंरचना पर हमला हो तो धारा 66F भी लागू हो सकती है।
धारा 67B सबसे गंभीर है क्योंकि इसमें बच्चे शामिल हैं। इसके साथ POCSO भी लागू होता है। बच्चों से संबंधित यौन अपराधों को कानून में सबसे गंभीर माना जाता है।
