📋 भाग 3.2

धारा 63 — प्रमाणपत्र आवश्यकता

"वह प्रमाणपत्र जो इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य को जीवन देता है"

धारा 63 BSA (पूर्व में धारा 65B IEA) इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की ग्राह्यता का प्रवेश द्वार है। इस भाग में ऐतिहासिक निर्णय और प्रमाणपत्र ड्राफ्टिंग की कला शामिल है।

2.1

धारा 63 BSA का विश्लेषण

📌 धारा 63(2) की चार अनिवार्य शर्तें
  • (a) नियमित उपयोग: जानकारी युक्त कंप्यूटर आउटपुट उस अवधि के दौरान उत्पन्न हुआ जब कंप्यूटर का उस प्रकार की जानकारी संग्रहीत या प्रसंस्कृत करने के लिए नियमित रूप से उपयोग होता था।
  • (b) नियमित इनपुट: उस अवधि में उस प्रकार की जानकारी कंप्यूटर में उसकी सामान्य गतिविधियों के क्रम में नियमित रूप से दी जाती थी।
  • (c) उचित संचालन: उस अवधि में कंप्यूटर उचित रूप से संचालित हो रहा था, या यदि संचालित नहीं था तो इससे इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख की सटीकता प्रभावित नहीं हुई।
  • (d) सटीक पुनरुत्पादन: जानकारी उस अवधि में कंप्यूटर में दी गई जानकारी का सटीक पुनरुत्पादन या व्युत्पन्न है।
🎯 धारा 63(4) — प्रमाणपत्र आवश्यकता

इस धारा के प्रयोजनों के लिए प्रमाणपत्र होना आवश्यक है जो:

• कंप्यूटर के प्रभारी व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षरित हो

• इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख की पहचान करे और उसके उत्पादन का तरीका बताए

• धारा 63(2) की शर्तों की पुष्टि करे

• कंप्यूटर और उसके संचालन का विवरण दे

2.2

Anvar P.V. v. P.K. Basheer (2014)

⚖️
Anvar P.V. v. P.K. Basheer
(2014) 10 SCC 473 | तीन न्यायाधीश पीठ

तथ्य: चुनाव याचिका में CD में संग्रहीत भाषण को साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया गया। धारा 65B प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं किया गया।

मुद्दा: क्या धारा 65B(4) प्रमाणपत्र के बिना इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य ग्राह्य है?

निर्णय: "द्वितीयक साक्ष्य के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख तब तक ग्राह्य नहीं होगा जब तक धारा 65B की आवश्यकताएं पूरी न हों। CD, VCD, चिप आदि के साथ अवश्य प्रमाणपत्र होना चाहिए।"
⚠️ Anvar का प्रभाव

पूर्व स्थिति रद्द:

• State (NCT of Delhi) v. Navjot Sandhu को प्रतिकूल सीमा तक खारिज किया

• पहले की "धारा 65 पर्याप्त" की व्याख्या समाप्त

नई स्थिति स्थापित:

• धारा 65B प्रमाणपत्र अनिवार्य

• बिना प्रमाणपत्र = अग्राह्य साक्ष्य

• प्रदर्श (Exhibit) चिह्नित करते समय प्रमाणपत्र आवश्यक

2.3

Arjun Panditrao v. Kailash Kushanrao (2020)

⚖️
Arjun Panditrao Khotkar v. Kailash Kushanrao Gorantyal
(2020) 7 SCC 1 | तीन न्यायाधीश पीठ

तथ्य: मतदान में धांधली का आरोप। मूल वोटिंग मशीन (EVM) न्यायालय में प्रस्तुत की गई।

मुद्दा: क्या मूल उपकरण प्रस्तुत होने पर भी धारा 65B प्रमाणपत्र आवश्यक है?

निर्णय: "जहां मूल दस्तावेज़ स्वयं प्रस्तुत किया जाता है, वह प्राथमिक साक्ष्य होगा। धारा 65B(4) की आवश्यकता केवल तब लागू होती है जब द्वितीयक साक्ष्य मांगा जाता है।"
✅ Arjun Panditrao के स्पष्टीकरण

1. प्राथमिक बनाम द्वितीयक का स्पष्टीकरण:

• मूल उपकरण न्यायालय में = प्राथमिक साक्ष्य = कोई प्रमाणपत्र नहीं

• प्रतिलिपि/प्रिंटआउट = द्वितीयक साक्ष्य = प्रमाणपत्र अनिवार्य

2. Shafhi Mohammad का स्पष्टीकरण:

• प्रमाणपत्र ट्रायल समाप्त होने से पहले किसी भी चरण पर दिया जा सकता है

• न्यायालय देर से दाखिल करने की अनुमति दे सकता है

3. कौन प्रमाणपत्र दे सकता है:

• कंप्यूटर का प्रभारी व्यक्ति (Person in charge)

• कंप्यूटर के संचालन का प्रबंधन करने वाला

• जानकारी का स्वामी होना आवश्यक नहीं

📊 Anvar और Arjun Panditrao की तुलना
पहलूAnvar (2014)Arjun Panditrao (2020)
मुख्य सिद्धांतप्रमाणपत्र अनिवार्यमूल उपकरण पर अनिवार्य नहीं
द्वितीयक साक्ष्यप्रमाणपत्र आवश्यकप्रमाणपत्र आवश्यक (पुष्टि)
प्राथमिक साक्ष्यस्पष्ट नहींप्रमाणपत्र आवश्यक नहीं
समयप्रदर्श चिह्नित करते समयट्रायल समाप्त होने से पहले
2.4

प्रमाणपत्र ड्राफ्टिंग

🏛️ धारा 63 BSA प्रमाणपत्र — नमूना प्रारूप
धारा 63 भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 के अंतर्गत प्रमाणपत्र

मैं, [नाम], [पद], [संस्था/कंपनी का नाम], [पता], एतद्द्वारा निम्नलिखित प्रमाणित करता/करती हूं:

1. इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख की पहचान:
प्रस्तुत इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख [विवरण - जैसे: ईमेल/WhatsApp संदेश/बैंक स्टेटमेंट] है जो [कंप्यूटर/सर्वर का विवरण] से प्राप्त किया गया है।

2. कंप्यूटर का विवरण:
कंप्यूटर जिससे यह अभिलेख उत्पन्न हुआ: [विवरण - निर्माता, मॉडल, स्थान]
ऑपरेटिंग सिस्टम: [विवरण]
सॉफ्टवेयर: [विवरण]

3. धारा 63(2) की शर्तों की पुष्टि:
(क) संबंधित अवधि के दौरान उक्त कंप्यूटर का इस प्रकार की जानकारी संग्रहीत/प्रसंस्कृत करने के लिए नियमित रूप से उपयोग होता था।
(ख) उस अवधि में इस प्रकार की जानकारी कंप्यूटर में नियमित रूप से दी जाती थी।
(ग) उक्त अवधि में कंप्यूटर उचित रूप से संचालित था।
(घ) प्रस्तुत जानकारी कंप्यूटर में दी गई जानकारी का सटीक पुनरुत्पादन है।

4. मेरा पद और अधिकार:
मैं उक्त कंप्यूटर/कंप्यूटर प्रणाली का प्रभारी व्यक्ति हूं और इस प्रमाणपत्र को देने के लिए अधिकृत हूं।

दिनांक: [तारीख]
स्थान: [स्थान]

हस्ताक्षर: _______________
नाम: [पूरा नाम]
पद: [पद]
संपर्क: [फोन/ईमेल]
⚠️ सामान्य ड्राफ्टिंग गलतियां

बचें:

• "यह प्रमाणपत्र धारा 65B के अनुसार है" — अब धारा 63 BSA है

• कंप्यूटर का विवरण न देना

• चारों शर्तों की पुष्टि न करना

• "प्रभारी व्यक्ति" के बजाय कोई अन्य व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षर

• तारीख और स्थान का अभाव

🎯 मुख्य बिंदु — भाग 3.2

  • धारा 63 BSA = पूर्व की धारा 65B IEA — द्वितीयक इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के लिए अनिवार्य
  • Anvar (2014): प्रमाणपत्र के बिना द्वितीयक इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य अग्राह्य
  • Arjun Panditrao (2020): मूल उपकरण प्रस्तुत होने पर प्रमाणपत्र आवश्यक नहीं
  • प्रमाणपत्र ट्रायल समाप्त होने से पहले किसी भी चरण पर दिया जा सकता है
  • प्रमाणपत्र में चारों शर्तों [धारा 63(2)] की पुष्टि होनी चाहिए
  • कंप्यूटर का प्रभारी व्यक्ति ही प्रमाणपत्र दे सकता है

📝 त्वरित मूल्यांकन — भाग 3.2

1. Anvar v. Basheer के अनुसार, धारा 65B प्रमाणपत्र:
सही उत्तर: B. Anvar ने स्पष्ट किया कि द्वितीयक इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के लिए धारा 65B प्रमाणपत्र अनिवार्य है।
2. Arjun Panditrao के अनुसार, प्रमाणपत्र आवश्यक नहीं जब:
सही उत्तर: C. Arjun Panditrao ने स्पष्ट किया कि मूल उपकरण प्रस्तुत होने पर वह प्राथमिक साक्ष्य है और प्रमाणपत्र आवश्यक नहीं।
3. धारा 63(4) के अनुसार, प्रमाणपत्र कौन दे सकता है?
सही उत्तर: D. धारा 63(4) के अनुसार, प्रमाणपत्र उस व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षरित होना चाहिए जो कंप्यूटर का प्रभारी है या उसके संचालन का प्रबंधन करता है।